चिरंजीव चैतन्य भदौरिया
प्रपौत्र डाक्टर राजेन्द्र सिंह भदौरिया
पुत्र श्री विवेक सिंह भदौरिया
जन्म दिनांक- १ मार्च २००९,जन्म समय - दोपहर १२:००:०० बजे.
जन्म स्थान - आगरा शहर
लगन
लगन ग्रह विवेचन:- जातक की कुन्डली में वृषभ लगन है,राशिपति शुक्र ग्यारहवें भाव में आय के स्थान में विराजमान है,जातक के कुटुम्ब और धन भाव तथा विद्या और संतान भाव के स्वामी बुध है,तथा धर्म और भाग्य स्थान में मकर राशि के मोक्ष स्थान तथा पत्नी स्थान के मालिक मंगल,मृत्यु और आय भाव के स्वामी गुरु तथा आसमानी रूहों के स्वामी राहु के साथ विराजमान है। जातक के तीसरे भाव पराक्रम और हिम्मत के स्वामी चन्द्रमा है,जो मोक्ष स्थान में अद्रश्य रूप से विराजमान है,जिन्हें मोक्ष स्थान और पत्नी स्थान के मालिक मंगल के द्वारा नष्ट किया जा रहा है। जातक के सुख भाव के स्वामी सूर्य है,इस भाव को माता का स्थान भी माना जाता है,जहाँ धर्म और रोजगार भाव के मालिक बक्री शनि के द्वारा आच्छादित किया गया है,सूर्य रोजगार स्थान में शनि की राशि कुम्भ में विराजमान है,जातक के विद्या स्थान के मालिक बुध है,जो धन भाव के भी स्वामी है और पत्नी तथा मोक्ष स्थान के स्वामी मंगल,मृत्यु और आय भाव के स्वामी गुरु,आसमानी रूहों के मालिक राहु के साथ धर्म स्थान में विराजमान है। जातक के कर्जा दुश्मनी और बीमारी के मालिक शुक्र है,जो लगन के भी मालिक है और मीन राशि के उच्च के होकर आय भाव में विराजमान हैं। जातक के सप्तम भाव पत्नी और साझेदारी के स्वामी मंगल है,जो मोक्ष स्थान के भी मालिक है,और धन तथा शिक्षा के मालिक बुध,मृत्यु और आय भाव के स्वामी गुरु तथा आसमानी रूहों के स्वामी राहु के साथ धर्म तथा भाग्य भाव में विराजमान हैं। जातक के मृत्यु भाव के स्वामी गुरु है जो आय भाव के भी स्वामी है,और धन तथा शिक्षा और संतान भाव के स्वामी बुध,पत्नी साझेदार तथा मोक्ष स्थान के स्वामी मंगल,और आसमानी रूहों के मालिक राहु के साथ धर्म और भाग्य में विराजमान हैं। जातक के नवें भाव के स्वामी शनि हैं,जो दसवें भाव के भी स्वामी है,और सुख भाव में बक्री होकर विराजमान हैं। जातक के ग्यारहवें भाव के स्वामी गुरु है जो म्रुत्यु भाव के भी स्वामी है,और पत्नी तथा साझेदारी के भाव सप्तम और मोक्ष स्थान के स्वामी मंगल,धन और सन्तान तथा विद्या भाव के मालिक बुध,आसमानी रूहों के मालिक राहु के साथ धर्म स्थान में विद्यमान है। जातक के बारहवें भाव मोक्ष स्थान के स्वामी मंगल है जो सप्तम स्थान पत्नी तथा साझेदारी के भी मालिक है,जो धर्म और भाग्य स्थान के नवें भाव में गुरु बुध और राहु के साथ विद्यमान है।
ग्रहों की द्रिष्टि और स्थान का विवेचन:- जातक के लगनेश शुक्र है,और शुक्र ग्यारहवें स्थान में विराजमान है। शुक्र भौतिक सुखों का स्वामी है,और धन जायदाद भवन और स्त्री धन के साथ आभूषणों से तथा खेती वाली जमीनों से अपना सम्बन्ध रखता है। जातक के नवें भाव धर्म और भाग्य के स्थान में विराजमान गुरु और राहु की द्रिष्टि शुक्र पर है,तथा मीन का शुक्र उच्च का माना जाता है,लेकिन मकर राशि के गुरु की नीच की द्रिष्टि से शुक्र आच्छादित है,और प्रभावित है,इसके अलावा तीसरे भाव में विराजमान केतु भी अपनी नवीं त्रिकोणात्मक द्रिष्टि से अपना बल शुक्र को दे रहे है। लगनेश शुक्र से दूसरे भाव में चन्द्रमा स्थापित है,जो तीसरे भाव का स्वामी है,और पराक्रम तथा हिम्मत का मालिक है,लालकिताब से शुक्र को पत्नी और चन्द्र से माता का रूप दिया गया है,लगनेश से दूसरे भाव को जातक के चेहरे का भाव कहा जाता है,चन्द्रमा के उपस्थित होने के कारण जातक का चेहरा जातक की माता से मिलता हुआ होता है,जातक के चेहरे पर चन्द्रमा की तरह से शीतलता होती है,जातक की बोलने की कला चन्द्रमा के अनुसार ही होती है,जातक की मुद्रा हमेशा सोचने जैसी होती है,चन्द्रमा माता का कारक है।
